आज बलिदान दिवस
शत शत नमन,,,,, दैनिक म्हारो स्वदेश
आजाद हूं आजाद ही रहूंगा,,,,, बलिदान दिवस पर विशेष,,,,, ठाकुर भगत सिंह चौहान,,,,,,,,, भारत की आज़ादी की इतिहास पर गौर किया जाए तो लहू से लिखा अध्याय ही दिखेगा ना जाने कितने क्रांतिकारियों और देशभक्तोंने इस भूमि पर अपने आप को बलिदान किया मातृभूमि की दासता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अपने प्राणों का उत्सर्जन किया वैसे सन 1700 से धीरे धीरे चिंगारी प्रारंभ हो गई थी सन 18 57 में क्रांति ने ज्वाला का रूप ले लिया था और यह संघर्ष चलता रहा इस पुनीत कार्य में महिलाओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया,,,, क्रांति का संघर्ष धीरे धीरे बढ़ता चला गया चंद्रशेखर आजाद ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की रक्षार्थ मैं अर्पण कर दिया क्रांति यज्ञ के महानायक बचपन में गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन में हिस्सा लेकर अंग्रेजों की वे तो की पिटाई की सजा के बाद बालक आजाद ने अहिंसा का मार्ग छोड़कर क्रांति का पथ चुन लिया आजादी आंदोलन की आस्था के साथ जुड़ गए चंद्रशेखर आजाद ने कसम खाई थी कि मैं अंग्रेजों की गोली से कभी नहीं मारूंगा ना अंग्रेज मुझे पकड़ सकेंगे मैं आजाद हूं आजाद ही रहूंगा और यह बात अंतिम सांसे तक सत्य साबित हुई मुखबिर की खबर से चंद्रशेखर आजाद को ऑल फ्रेंड पार्क में चारों तरफ से अंग्रेजों ने घेर लिया चंद्र शेखर आजाद भी आखिरी दम तक युद्ध करते रहे एक गोली बचाकर रखी थी उस गोली को स्वयं चंद्रशेखर आजाद ने अपने मस्तिक पर दे मारी किंतु अंग्रेजों के हाथ जिंदे नहीं पकड़े गए ना ही उनकी गोली से मारे गए आज चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस है इस क्रांति वीर योद्धा को शत शत नमन