हरदा में निकलेगी भगवान भोलेनाथ की बारात
शिवधाम मंदिर की 800 साल पुरानी प्रतिमा के होंगे दर्शन टिमरनी
महाशिवरात्रि पर मंगलवार को शिवालयों में भक्तों की भीड़ रहेगी। इसके तहत टिमरनी के प्राचीन शुक्रवारा स्थित शिवधाम मंदिर, हंडिया के रिद्धनाथ, नेमावर के सिद्धनाथ, सिराली के तिलभांडेश्वर, चारुवा के गुप्तेश्वर और कांकरिया की बीवर की गुफा में स्थित शिवलिंग की भक्त विशेष पूजा अर्चना करेंगे। इसके चलते शिवालयों में भक्तों का तांता लगेगा। टिमरनी के शिवधाम शुक्रवारा शंकर मंदिर में शिवलिंग पर जनेऊ की आकृति है। इसके अंदर देखने पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की अद्भुत छवि देखने को मिलती है। बुर्जुगों का कहना है 800 साल पुराना शिवलिंग खुदाई के दौरान जमीन से निकला था और जहां मिला वहीं इसकी स्थापना की गई। यहां सबकी मनोकामना पूरी होती है। मंदिर के सामने 450 साल पुराना बरगद का पेड़ है। मंदिर क्षेत्र में मां रेणुका, माता दुर्गा, भगवान गणेश, बगुलामुखी माता, सिद्ध हनुमान मंदिर है। मंदिर में शुक्रवार सुबह 4 बजे से पूजा शुरू होगी। सुबह 8.30 बजे महाआरती कर महाप्रसाद बांटा जाएगा।
गुफा में गूंजेगा बोल बम
कांकरिया| बीवर की प्राचीन गुफा में शिवरात्रि पर विशेष पूजा होगी। इस दौरान बोल बम के जयकारे लगेंगे। हर साल शिवरात्रि पर गुफा के अंदर विराजित भगवान शिव की प्रतिमा पर गुफा में स्थित झिर के पानी से श्रद्धालु शिव का जलाभिषेक करते हैं। प्राचीन गुफा को देखने हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं को यहां साल में सिर्फ शिवरात्रि के दिन ही दर्शन हो पाते हैं, क्योंकि इस दिन गुफा में लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है। वहीं पुलिस प्रशासन भी तैनात रहता है। आयोजन ग्रामीणों नेे बताया महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए गुफा के आसपास की साफ - सफाई की गई है।
दैनिक म्हारो स्वदेश
चारूवा में प्राचीन शिव मंदिर,
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खिरकिया। हरदा जिले के खिरकिया है भगवान भोलेनाथ का अनोखा मंदिर। बताया जाता है कि यह मंदिर एक टीले के नीचे से निकला था। इसके फर्श पर अनोखा चक्रव्यूह बना हुआ है यहां पहुंचने वालों के लिए आश्चर्यचकित करता है। यह वैसे तो हर दिन श्रद्बालुओं का आना जाना होता है लेकिन सावन माह और सावन सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्बालु दर्शन करने आते हैं। क्षेत्र के सबसे प्रमुख प्राचीन गुप्तेश्वर मंदिर हरिपुरा चारूवा में इस दिन हजारों श्रृद्धालु पहुंचते हैं। गुप्तेश्वर मंदिर ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल है जिससे कई तरह की किंवदंती जुड़ी हैं।
कहा जाता है कि यह मंदिर टीले के नीचे दबा था। गुप्तेश्वर मंदिर का प्रकटीकरण करीब डेढ़ सौ साल पुराना बताया जाता है। जहाँ आज भव्य शिवालय है, वहाँ किसी जमाने में वृक्षों से आच्छादित जंगल हुआ करता था। घनी झाडियों से घिरा एक विशाल टीला था, जिसे बंजारी टीला के नाम से जाना जाता था। लोगों ने टीले की खुदाई की तो उसके अंदर से एक मंदिर प्रकट हुआ।