मन से की गई पूजा साक्षात हरि ग्रहण करते हैं।- दीदी जी
कथा में देवी जी ने बताया भक्ति में मन का विशेष महत्व है। मन से की गई पूजा साक्षात हरि ग्रहण करते हैं। और मन भी शुद्ध हो जाता है जिसमे गलत विचारों का प्रवेश नही होता और हम पाप कर्मों से बच जाते हैं।
वहीं मन संसार में लगा देने से हम मोह माया के बंधनों में बंध जाते हैं।
व्रत के महत्व को समझाते हुए देवी जी ने बताया कि व्रत का अर्थ केवल भूखे रहने नहीं होता ऐसे तो धरती पर न जाने कितने जीव जंतु रोज व्रत करते हैं किंतु फल प्राप्त नही करते क्योंकि मायने ये रखता है व्रत में हमने ईश्वर का कितना नाम जाप किया और किस भाव से उनकी पूजा की।
दीदीजी ने बताया कि सप्त दिवसीय कथा को भगवान के श्री चरणों में समर्पित करते हुए ठाकुर जी के श्री चरणों में निवेदन करते है कि सभी योनियों में भटक रहे पितृगण को शांति व मुक्ति प्राप्त हो और साथ ही वो सभी की रक्षा करें और जल्दी ही इस महामारी से छुटकारा दिलाएं।
आगे कथा में देवी जी दिव्य ईश्वर स्वरूप संतो के पवित्र चरित्र और महानता का विस्तृत वर्णन किया और अनेक मीठे मीठे भजनों का रसपान कराते हुए कथा के तृतीय दिवस की ज्ञानमयी कथा का विश्राम किया।