आज शहीदी दिवस, धर्म की रक्षा के लिए दिया था बलिदान
आज का दिन इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है धर्म की रक्षा के लिए मुगल बादशाह से बगावत करने वाले नौवें गुरु तेज बहादुर सिंह का आज शहीदी दिवस है धर्म की रक्षा के लिए तेग बहादुर सिंह ने अपना बलिदान दिया और धर्म की रक्षा की किंतु मुगल बादशाह के सामने नहीं झुके
औरंगजेब किसी दूसरे धर्म की बढ़ाई नहीं सुनता था सभी धर्मों को नष्ट कार इस्लाम को बढ़ावा देना चाहता था उसके नुमाइंदे उसे गलत राह पर दूसरे धर्मों के बारे में नफरत फैलाने की सलाह देते थे
उस समय की बात है, औरंगजेब का जब शासन काल था, तो उसके दरबार में एक विद्वान पंडित आकर “भागवत गीता” का श्लोक पड़ता और उसका अर्थ औरंगजेब को समझाता था. गीता का श्लोक सुनाते समय पंडित औरंगजेब को कुछ गीता के श्लोकों एवं उसके अर्थों का वर्णन नहीं किया करता था. एक दिन दुर्भाग्यवश पंडित की तबीयत खराब हो गई और उसने औरंगजेब को गीता सुनाने के लिए अपने पुत्र को भेज दिया. परंतु उसने अपने पुत्र को यह नहीं बताया कि , कुछ गीता के श्लोकों को वह औरंगजेब के सामने वर्णित नहीं किया करता था. पंडित के बेटे ने जाकर गीता का संपूर्ण रूप उसके अर्थ के साथ से वर्णन औरंगजेब के सामने कर दिया. जिससे औरंगजेब को यह ज्ञात हो गया, कि हर जाति के धर्मों का अपना एक अलग ही महत्व है एवं हर धर्म अपने में महान धर्म होता है.
परंतु औरंगजेब केवल अपने धर्म को ही महत्वता देता था, और किसी अन्य धर्म की प्रशंसा सुनना ही पसंद करता था. फिर तुरंत औरंगजेब के सलाहकारों ने उसे यह बताया कि सभी धर्मों के लोगों को केवल इस्लाम धर्म ही धारण करवा देना चाहिए. औरंगजेब को यह सलाह पसंद आई और उसने सबको इस्लाम धर्म धारण करने का आदेश दिया और इस कार्य को पूरा करने के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदारी भी सौंप दी.
उसने यह सख्त आदेश जारी करवाया की सभी धर्मों एवं जाति के लोगों को केवल इस्लाम धर्म ही कबूल करना होगा अन्यथा उनको मौत के घाट उतार दिया जाएगा. इस तरह औरंगजेब ने जबरदस्ती अन्य धर्मों के लोगों को इस्लाम धर्म धारण करने पर मजबूर करना शुरू कर दिया और उन्हें प्रताड़ित भी किया.
औरंगजेब के इस प्रताड़ना से प्रभावित होकर कश्मीर के पंडित गुरु तेग बहादुर सिंह जी के पास पहुंच गए और उन्हें बताया कि औरंगजेब ने किस तरीके से इस्लाम धर्म को अन्य धर्म के लोगों को धारण करने का आदेश दिया है और उन लोगों को बहुत ही दुख दायक तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उनकी बहू-बेटियों की इज्जत को बहुत खतरा रहता है और जिस जगह पर वे लोग पानी भरने जाते हैं वहां पर हड्डियां एवं अन्य प्रकार की धर्म भ्रष्ट हेतु की चीजें फेंक दी जाती हैं. यह सब कुछ समस्याओं का वर्णन उन्होंने गुरु तेग बहादुर सिंह जी के सामने किया और कहा कि हमें और हमारे धर्म को सुरक्षित करें.
जिस वक्त कश्मीरी पंडित अपनी समस्याओं का वर्णन गुरु तेग बहादुर सिंह जी के सामने कर रहे थे, उसी समय वहां पर उनके 9 वर्षीय पुत्र बाला प्रीतम (गुरु गोविंद सिंह) पहुंच गए और अपने पिताजी से यह पूछने लगे कि यह सभी लोग इतने उदास एवं भय पूर्ण क्यों लग रहे हैं ? और पिताजी आप इतने गंभीरतापूर्वक किस चीज का विचार कर रहे हैं ? गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने कश्मीरी पंडितों की सभी समस्याओं का वर्णन अपने सुपुत्र बाला प्रीतम के सपने किया .
गुरु जी के पुत्र ने गुरु जी से पूछा कि कैसे इन लोगों की सहायता करके इनको विषम परिस्थिति से बाहर निकाला जा सकता है ? इस पर गुरुजी ने अपने पुत्र को जवाब दिया कि इस विषम परिस्थिति से उभरने के लिए बलिदान देना होगा. इसके जवाब में उनके सुपुत्र बाला प्रीतम जी ने कहा कि, इस जनहित के कार्य को करने के लिए आप जैसा कोई -और योग्य पुरुष नहीं है. भले ही आपको इसके लिए बलिदान देना पड़े आप बलिदान दीजिए परंतु इनके धर्म की रक्षा अवश्य करें.
बाला प्रीतम की बातों को सुनकर वहां उपस्थित सभी लोगों ने उनसे यह कहां, कि यदि आपके पिता श्री ने बलिदान दे दिया तो आप अनाथ हो जाओगे और आपकी माता को विधवा के रूप में जीवन व्यतीत करना होगा. इस पर बाला प्रीतम ने उपस्थित वहां सभी लोगों को यह जवाब दिया, कि यदि सिर्फ एक की बलिदानी से लाखों मासूम बच्चे अनाथ होने से बच जाएंगे और यदि सिर्फ मेरी माँ के विधवा होने से अनेकों माएँ विधवा होने से बच सकती है, तो मुझे यह बलिदान गर्व से मंजूर है.
इसके बाद गुरु तेग बहादुर
जी ने कश्मीरी पंडितों को एक संदेशा औरंगजेब को पहुंचाने के लिए कहा उन्होंने बोला कि , “औरंगजेब यह कह दो, कि यदि तेग बहादुर जी इस्लाम कबूल कर लेंगे तो हम भी अपनी स्वेच्छा से इस्लाम धर्म को कबूल कर लेंगे और अगर गुरु जी ने आपके इस्लाम धर्म को कबूल नहीं किया तो हम भी आपके धर्म को कबूल नहीं करेंगे और आप हम पर किसी भी प्रकार का जुल्म इस्लाम धर्म को कबूल करने के लिए नहीं करोगे और जबरन इस्लाम धर्म को भी कबूल करने के लिए बाधित नहीं करोगे”. औरंगजेब ने उनकी कही बातों को स्वीकार कर लिया.
इसके बाद गुरु तेग बहादुर दिल्ली में औरंगजेब के दरबार में अपनी स्वेच्छा से पहुंच गए. इसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को इस्लाम धर्म कबूल करवाने के लिए अनेकों प्रकार के लालच दिए और इतना ही नहीं इस्लाम धर्म कबूल ना करने पर उनको अनेकों तरीके से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं उनको इस्लाम धर्म कबूल करवाने के लिए बंदी बनाकर उनके सामने उनके दो-शिष्यों को मौत के घाट उतार दिया गया है.जिससे औरंगजेब ने सोचा कि ऐसा करने से गुरु तेग बहादुर यह देखकर भयभीत हो जाएंगे और आसानी से इस्लाम कबूल कर लेंगे.
परंतु इससे भी गुरु तेग बहादुर जी टस से मस नहीं हुए और अपने अटल निर्णय पर डटे रहे. गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब यह कहा कि, जो तुम यें जबरन लोगों को इस्लाम धर्म कबूल कबूल करने के लिए मजबूर कर रहे हो ना , तो यह भी समझ लो, कि तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो. तुम्हारा इस्लाम धर्म तुमको यह अनुमति नहीं देता कि तुम किसी भी अन्य धर्म को जबरन अपने धर्म में परिवर्तित करो.
औरंगजेब को गुरु तेग बहादुर की यह बातें बहुत बुरी लगी और उसे बहुत गुस्सा आया. औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु तेग बहादुर जी को शीश काटकर मृत्युदंड देने का हुक्म दे दिया.
गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान –
औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को 24 नवंबर 1675 को शीश काटकर मृत्युदंड देने का आदेश दे दिया. सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी के याद में उनके “शहीदी स्थल” पर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया है, जिसका नाम “शीशगंज साहिब” है. हमें गुरु तेग बहादुर सिंह जी के जीवन परिचय से यह सीख लेनी चाहिए कि, जनसेवा एवं मानव कल्याण सबसे सर्वोपरि है. उन्होंने मानव कल्याण हेतु अनगिनत कार्य किए थे.
उन्होंने यह भी बताया है कि सभी प्रकार के धर्म अपने में बहुत महत्वपूर्ण हैं और उनका एक अपना महत्व भी होता है. कोई भी धर्म छोटा या बड़ा नहीं होता सब धर्म अपने में सामान्य होते हैं. गुरुजी ने मानव कल्याण एवं धर्म रक्षा हेतु अपने आप को बलिदान कर दिया .आज के समय में हमें भी जरूरत है कि, उनकी बातों का आदर करें और उन्हें अपने जीवन में फॉलो करें किसी भी धर्म एवं जाति के लोगों का निरादर नहीं करना चाहिए. सभी धर्म को सम्मान एवं महत्वता देनी चाहिए.