दैनिक म्हारो स्वदेश
भुवाणा क्षेत्र का पारंपरिक पर्व है सांझा होली
आज से मनाया जाएगा सांझा होली का पर्व, हरदा हमारा भारत देश त्योहारों का देश है पारंपरिक त्यौहारों की संखला मैं सांझा होली एक पर्व है इस पर्व को कुंवारी कन्या और महिलाएं दीवाल पर गोवर फूल आदि से 16 दिन तक सांझा होली दीवाल पर बनाती है सभी सहेलियां इकट्ठा होकर इस पर्व को संध्या के समय गोबर फूल से बना कर उसकी आरती तथा सांझा होली गीत गाकर इस पारंपरिक पर्व को को मनाती हैं आरती के पश्चात ज्वार की धानी का प्रसाद बाटा जाता है इस पर्व से सभी सहेलियां संध्या को एकत्रित होकर इसका आयोजन करती हैं यह भारतीय संस्कृति का पारंपारिक पर्व है 16 दिन के इस पर्व में नन्ही बालिकाओं इस पर्व को बड़े उत्सव से मनाते आ रही हैं किंतु कुछ वर्षों से यह पारंपरिक पर्व मनाने वालों की कमी होने लगी है इसका मूल कारण अपनी संस्कृति से विमुख होना है पश्चिमी संस्कृति के मोहल्ले आजकल भारतीय संस्कृति परंपराओं पर इसका बुरा असर होने लगा है कुछ पर वैसे हैं जो परंपरा से विमुख होते जा रहे हैं इनमें से सांझा होली प्रमुख है सांझा होली गीत कि कुछ पंक्तियां इस प्रकार है, चल भाई सांझा खेलने चले चल भाई सांझा खेलने चले, आदि हमारा मूल उद्देश या है कि हमारे पारंपरिक क्षेत्रीय पर्व को विमुख होने से से बचाया जा सके * भुवाणा संस्कृति के अनुसार सांझा होली एक विशेष पर्व है और इस पर्व को मनाया जाना चाहिए