मृत्यु इंसान को चार बार संदेश देती है ,,,, संत मंगला देवी
हरदा कच्छ कड़वा पाटीदार भवन मैं चल रही है भागवत कथा का चौथा दिन, हरदा नगर में कच्छ कड़वा पाटीदार भवन में हरदोल बाबा मां काली समिति के तत्वाधान में भागवत कथा में आज की कथा संत पुत्री मंगला देवी ने कहा कि मृत्यु इंसान को चार बार संदेश देती है कि मैं आने वाली हूं ईश्वर को याद करो अच्छे कर्म करो पर करवाएं इंसान घमंड में समझ नहीं पाता है बाल सफेद होने पर बाल काले करवा लेता है काम दिखाने पर चश्मा लगा लेता है दांत टूटने पर नए दांत लगवा लेता है कमर दुखने पर चमनपरास एवं ताकत की दवाइयां गोली खा लेता है पर ईश्वर का भजन सत्संग नहीं करता अपने आप को हुआ नहीं करता है पांचवीं बार मृत्यु इंसान को कोई संदेश नहीं देती आकर ले जाती है संत मंगला देवी ने बताया कि एक देश का पैसा दूसरी देश में नहीं चलता है तो ईश्वर के पास कैसे चलेगा वह पर राम नाम का धन चलेगा इसलिए राम नाम का धन कमाओ संत पुत्री ने गरुड़ पुराण का वर्णन भी किया व्रत करने का भी तरीका बताएं उन्होंने कहा कि इंसान व्रत में अन्य जल छोड़ देता है लेकिन धूम्रपान करना तंबाकू खाना क्रोध करना और बुरी आदतें नहीं छोड़ता है बुरी आदतें जब छोड़ेगा तभी व्रत सफल होगा वही सच्चा व्रत होगा संत पुत्री ने ऋषि की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार ऋषि मुनि सत्संग सुना रहे थे इस कथा को भरत सुन रहे थे इनके अलावा कोई नहीं सुन रहा था ऋषि ने भरत को राजा बनाया समय आने पर भरत जी ने भी राजपाट अपने पुत्रों को देकर अपने पुत्रों को वह जंगल में तपस्या करने चले गए उन्होंने कहा कि नेपाल में दामोदर नदी है वहीं पर शालिग्राम जी मिलते हैं एवं नर्मदा जी में भगवान शंकर के शिवलिंग मिलते हैं भरत जी दामोदर नदी में स्नान कर रहे थे तभी एक हिरनी बच्चे को जन्म देकर मर जाती है हिरनी का बच्चा भी पानी में बह जाता है इसलिए भरत जी का अगला जन्म हिरण का होता है उसके बाद हिरण जंगल में सूखे पत्ते खाकर तपस्या करते हैं उसके कारण अगला जन्म ब्राह्मण का मिलता है ब्राह्मण के जन्म में एक राजा की पालकी जाती रहती है उसमें से एक पालकी उठाने वाला बीमार पड़ जाता है तब राजा आदेश देता है कि जो मिले उसे पालकी उठाने ले आओ सैनिक भरत जी को ले आते हैं पालकी लेकर चलते समय कोई जीव पैर में ना आए नहीं मर जाए इसके कारण पालकी ऊपर उठाने से राजा के सिर में लग जाती है राजा के क्रोध करने पर भरत जी उसे उपदेश देते हैं राजा उनके उपदेश सुनकर चरणों में गिर पड़ता है और समझ जाता है कि यह कोई महान संत हैं संत पुत्री ने कृष्ण जन्म और वामन अवतार की कथा का भी विशेष वर्णन किया है कृष्ण जन्म उत्सव तथा वामन अवतार कथा का भी आनंद उठाया सभी धर्म प्रेमियों ने उत्साह पूर्वक से मनाया जानकारी समिति के पप्पू सैनी राजेश नागर और लालू त्रिपाठी ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया