शहीदे आजम भगत सिंह की जयंती पर शत-शत नमन
28 सितंबर 1907 जयंती पर विशेष





दैनिक म्हारो स्वदेश समाचार पत्र, संपादक भगत सिंह चौहान,






किसान मजदूर हितेषी थे, सरदार भगत सिंह

सरदार भगत सिंह की जयंती पर विशेष,,,,, भारत की आजादी में युवाओं के सिरमोर कहलाने वाले भारत माता के लाडले सपूत सरदार भगत सिंह कि आज जयंती है सरदार भगत सिंह ने भारत की आजादी में क्रांति की ज्वाला को गति प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी सरदार भगत सिंह कभी भी बेवजह खून खराबे और निर्देशों का खून बहाने के पक्ष में नहीं है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण असेंबली का बम कांड जब भगत सिंह व उनके दोस्त बटुकेश्वर दत्त तथा साथी गण ने असेंबली में बिल पास ना होने के विरोध में गूंगी और बहरी सरकार को अपना अधिकार दिखाने के लिए खाली असेंबली में एक बम फेंककर धमाका किया था इन भावना से भी हम समझ सकते हैं कि सरदार भगत सिंह किसी  बेवजह वाह निर्दोषों को के खिलाफ कभी नहीं थे आजादी की जंग में युवाओं के सेनापति के रूप में सरदार भगत सिंह ने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया सरदार भगत सिंह किसान मजदूर हितेषी थे उनका उद्देश्य था कि अगर किसान मजबूत रहेगा तो भारत मजबूत रहेगा वही मजदूर खुश रहेगा तो भारत में खुशहाली रहेगी क्योंकि किसान और मजदूर दोनों अपना पसीना बहाते हैं अगर यह पसीना ना भाई तो देश में आर्थिक तंगी आ सकती है आज के समय में सरदार भगत सिंह के सपने को देखा जाए तो मजदूर किसान आज भी परेशान है उसका मुख्य कारण हमारी नीति आज भी कई किसान देश में आत्महत्या करते देखे गए हैं वही कई मजदूर आज भी अपना जीवन यापन करने में अक्षम है भारत की आजादी की जंग में शहीद भगत सिंह का मूल उद्देश्य ही था भारत में किसान और मजदूर का पसीना सूखने के पहले उनका हक अधिकार मिले आज शहीद भगत सिंह की जयंती पर हम संकल्प ले की भारत को पुनः इन बातों से तथा मजदूर किसानों को उनके पसीने का हक दिलाने के लिए आम संघर्ष करेंगे 


सरदार भगत सिंह नास्तिक नहीं थे, भारत माता के उपासक थे,  भगत सिंह, आजादी की जंग में सर्वोच्च निछावरकरने वाले भारत माता के वीर सपूत सरदार भगत सिंह को भारत की आजादी की पहला उनके स्वयं परिवार से ही मिली थी उनका पूरा परिवार देश भक्त परिवार था बचपन में परिवार की गतिविधि देखकर  भगत सिंह के मन में भी देशभक्ति जाग उठी अमृतसर के जलियांवाला बाग कांड से तो उनका मन इतना दुखी हुआ कि उन्होंने जलियांवाला बाग के शहीदों के रक्त से कसम ही खाली थी कि मैं भारत माता को जल्द से जल्द इन फिरंगी ओ से मुक्त कर आऊंगा यही भावना से उन्होंने  खेत में कुछ-   बंदूकें जमीन में गाड़ दी और उसमें पानी डालने लगे या देखकर परिवार वालों ने जब पूछा कि यह बेटा तुम क्या कर रहे हो परिवार को जवाब देते हुए बताया कि मैं बंदूके लगा रहा हूं क्योंकि हमारे देश में बंदूकों की कमी है जब ज्यादा बंदूके हो जाएगी तो यहां फिरंगी को भगाने में काम आएगी इस भावना को देखते हुए परिवार के सदस्यों ने जी  समझ लिया था कि आगे चलकर भगत कुछ कर गुजरेगा क्योंकि पूत के पांव पालने में ही समझ आ जाते हैं और यह बात बचपन में ही परिवार के सदस्यों को समझ में आने लगी थी  भगत सिंह कुछ लेखकों का मानना है कि भगत सिंह नास्तिक थे अगर वह नास्तिक होते तो भारत माता के उपासक तथा हमेशा गीता का अध्ययन करते रहते नहीं , गीता व्यक्ति को  साहसी निर्भीक एवं सत पर चलने वाला बनाती है सरदार भगत सिंह भारत मां के सच्चे उपासक थे 63 दिन की भूख हड़ताल इसी का उदाहरण है जेल में भारत माता का चित्र के समक्ष सरदार भगत सिंह ने 63 दिन की बगैर अन्य जल लिए यह आराधना सफलतापूर्वक की थी 63 वे दिन अपने एक साथी यतींद्र दास को खोना पड़ा और जंग में अंग्रेजों को घुटने टेकना ही पड़े आखिरकार भारत माता के वीर सपूतों की हड़ताल सफलता पूर्ण हुई  सब भारत माता की आस्था और भगत सिंह का विश्वास भारत माता के प्रति था जय हिंद जय भारत सरदार भगत सिंह की जयंती पर विशेष,,,,, भारत की आजादी में युवाओं के सिरमोर कहलाने वाले भारत माता के लाडले सपूत सरदार भगत सिंह कि आज जयंती है सरदार भगत सिंह ने भारत की आजादी में क्रांति की ज्वाला को गति प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी सरदार भगत सिंह कभी भी बेवजह खून खराबे और निर्देशों का खून बहाने के पक्ष में नहीं है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण असेंबली का बम कांड जब भगत सिंह व उनके दोस्त बटुकेश्वर दत्त तथा साथी गण ने असेंबली में बिल पास ना होने के विरोध में गूंगी और बहरी सरकार को अपना अधिकार दिखाने के लिए खाली असेंबली में एक बम फेंककर धमाका किया था इन भावना से भी हम समझ सकते हैं कि सरदार भगत सिंह किसी  बेवजह वाह निर्दोषों को के खिलाफ कभी नहीं थे आजादी की जंग में युवाओं के सेनापति के रूप में सरदार भगत सिंह ने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया सरदार भगत सिंह किसान मजदूर हितेषी थे उनका उद्देश्य था कि अगर किसान मजबूत रहेगा तो भारत मजबूत रहेगा वही मजदूर खुश रहेगा तो भारत में खुशहाली रहेगी क्योंकि किसान और मजदूर दोनों अपना पसीना बहाते हैं अगर यह पसीना ना भाई तो देश में आर्थिक तंगी आ सकती है आज के समय में सरदार भगत सिंह के सपने को देखा जाए तो मजदूर किसान आज भी परेशान है उसका मुख्य कारण हमारी नीति आज भी कई किसान देश में आत्महत्या करते देखे गए हैं वही कई मजदूर आज भी अपना जीवन यापन करने में अक्षम है भारत की आजादी की जंग में शहीद भगत सिंह का मूल उद्देश्य ही था भारत में किसान और मजदूर का पसीना सूखने के पहले उनका हक अधिकार मिले आज शहीद भगत सिंह की जयंती पर हम संकल्प ले की भारत को पुनः इन बातों से तथा मजदूर किसानों को उनके पसीने का हक दिलाने के लिए आम संघर्ष करेंगे जय हिंद जय भारत

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