मां नर्मदा को छलनी करने वालों के खिलाफ

मां नर्मदा के आंचल को छलनी करने वालों के खिलाफ सरकार को फांसी का कानून बनाना चाहिए 

हरदा मध्यप्रदेश जीवनदायिनी मां नर्मदा नदी में कुछ वर्षों से उत्खनन इस कदर किया जा रहा है कि नर्मदा के घाटों को जगह-जगह से घायल कर दिया वहीं बीच-बीच नर्मदा नदी में मशीनों से रेत निकाली जा रही है जिससे जलीय जीव जंतुओं का नर्मदा नदी से पालन हो रहा है वही रेत के अवैध उत्खनन से नर्मदा का जल प्रदूषित हो रहा है क्योंकि जल को स्वच्छ बनाए रखने में रेत  जीव जंतु व वनस्पति तथा हरित नर्मदा का तटीय  क्षेत्र से जल प्रदूषण होने से रोका जा सकता है  यहां एक प्राकृतिक क्रिया है किंतु  मानवी शैतानों ने मां नर्मदा नदी के आंच inल को छलनी करने का कार्य जारी कर दिया है जबकि मां नर्मदा नदी जीवनदायिनी के साथ-साथ धर्म रक्षक भी है सनातन संस्कृति के अनुसार हम पर्वत नदी पेड़-पौधे जीव जंतु सभी में देवी रूप मानकर उनकी पूजा करते हैं उनकी रक्षा भी करना जरूरी है प्राकृतिक से छेड़छाड़ मानव हित में नहीं है उत्तराखंड इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है हमारा क रेवा खंड  खंड है मां नर्मदा नदी हमारी जीवनदायिनी मोक्षदायिनी सनातन संस्कृति के अनुसार मां नर्मदा प्रत्यक्ष है इसके दर्शन मात्र से ही सही पापों का नाश हो जाता है इसीलिए इसे  पुण्य सलिल र्व स भी कहा जाता है धर्म धारा धेनु पर जब-जब अत्याचार हुए हैं सृष्टि का विनाश भी हुआ है विगत दिनों धर्मसभा  में मैया जी सरकार ने भी यही बात कही थी नर्मदा को प्रदूषण से बचाना जरूरी है इस कार्य में सरकार प्रशासन को दोष देना जरूरी नहीं है स्वयं आम जनता को मां नर्मदा नदी के संरक्षण में मां के प्रति अपना कर्तव्य निभाना है धर्म सभा में भैया जी सरकार ने कहा था विदेशों में नदी को मां नहीं मानते किंतु अगर उसमें कचरा फेंकते तो दंडात्मक कार्रवाई हो जाती है क्योंकि उन्हें मालूम है कि यदि हमारी जीवनदायिनी वह जरूरत है हम आस्था से नदियों को मां कहते हैं उनका सम्मान करते हैं किंतु उसी में गंदगी प्रदूषण  केमिकल डालते हैं क्योंकि हम सब कुछ जानते हैं फिर भी नदी को प्रदूषित करने उसमें से रेत खनन तथा उनके आसपास के  पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं इसका मुख्य कारण हमारे यहां दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है इन को नुकसान पहुंचाने पर कार्रवाई की प्रक्रिया है किंतु नहीं की जाती है आज नर्मदा जयंती पर समस्त मां नर्मदा भक्तों से निवेदन है कि मां नर्मदा के घाटों पर जाकर नर्मदा को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाए तथा नर्मदा घाटों को हरित कर मां नर्मदा के घावों पर मलहम का कार्य करें और सरकार से मांग करें  नर्मदा नदी को प्रदूषित करने वालों मां नर्मदा में उत्खनन करने वालों पर सख्त कानून बनाया जाए अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब रेवाखंड भी आपदाओं से धीर जाएगे अमरकंटक से लेकर डिंडोरी तक मां नर्मदा की बड़ी दयनीय स्थिति है अमरकंटक से डिंडोरी के बीच में मां नर्मदा एकदम सिकुड़ गई है कहीं-कहीं तो गुप्त नर्मदा हो गई है इन क्षेत्रों में विकास इस कदर हुआ है अतिक्रमण इस कदर बड़ा है कि मां नर्मदा कहीं कहीं जगह गुप्त हो गई है इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं गर्मी के दिनों में इन क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की व्यवस्था की जाती है अगर नर्मदा नदी का सरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड की तर्ज पर हमारे क्षेत्र में भी रेवा खंड पर भी आपदा आ सकती है

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