परियोजना संचालक आत्मा हरदा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में प्रथम बार कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा के नवाचार घटक अंतर्गत कृषकों की मांग पर खरीफ मौसम में सोयाबीन फसल के विकल्प के रुप में रामतिल की किस्म जे एनएस - 28 का वितरण कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत हरदा श्री दिलीप कुमार यादव, सहायक संचालक कृषि श्री देवीसिंह वर्मा, श्री कपिल बेड़ा एवं श्री अखिलेश पटेल की उपस्थिति में किया गया। उन्होंने बताया कि रामतिल फसल कृषकों को बुआई हेतु 5 किलो प्रति हेक्टेयर बीज लगता है एवं इसका उत्पादन 7-8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। रामतिल की खेती असिंचित अवस्थाओ में वर्षा आधारित परिस्थितियों में बिना आदानों के सिमित निवेश में की जाती है। रामतिल के बीजों मे 38-43 प्रतिशत तेल तथा 20-30 प्रतिशत प्रोटिन पाया जाता है। साथ ही उक्त फसल को उगाने के उपरान्त रबी मौसम की फसल उगाई जाती है तो सोयाबीन दलहनीय एवं तिलहनीय फसल के फसल चक्र की अपेक्षा रामतिल के फसल चक्र में गेहुं एवं चने की फसल की ज्यादा पैदावार होती है।
हरदा सोयाबीन का विकल्प राम तिल परियोजना संचालक आत्मा हरदा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में प्रथम बार कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा के नवाचार घटक अंतर्गत कृषकों की मांग पर खरीफ मौसम में सोयाबीन फसल के विकल्प के रुप में रामतिल की किस्म जे एनएस - 28 का वितरण कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत हरदा श्री दिलीप कुमार यादव, सहायक संचालक कृषि श्री देवीसिंह वर्मा, श्री कपिल बेड़ा एवं श्री अखिलेश पटेल की उपस्थिति में किया गया।
उन्होंने बताया कि रामतिल फसल कृषकों को बुआई हेतु 5 किलो प्रति हेक्टेयर बीज लगता है एवं इसका उत्पादन 7-8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। रामतिल की खेती असिंचित अवस्थाओ में वर्षा आधारित परिस्थितियों में बिना आदानों के सिमित निवेश में की जाती है। रामतिल के बीजों मे 38-43 प्रतिशत तेल तथा 20-30 प्रतिशत प्रोटिन पाया जाता है। साथ ही उक्त फसल को उगाने के उपरान्त रबी मौसम की फसल उगाई जाती है तो सोयाबीन दलहनीय एवं तिलहनीय फसल के फसल चक्र की अपेक्षा रामतिल के फसल चक्र में गेहुं एवं चने की फसल की ज्यादा पैदावार होती है।