आदेश का उल्लंघन धारा-188 भारतीय दंड विधान अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आवेग
आदेश का उल्लंघन धारा-188 भारतीय दंड विधान अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आवे
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अनुराग वर्मा ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने हेतु भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर जिले में सम्पूर्ण लाक डाउन घोषित किया है। जारी आदेश अनुसार जिले में तत्काल प्रभार से सम्पूर्ण लाॅकडाउन घोषित किया गया है। सम्पूर्ण लाॅक डाउन में किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। जिले की समस्त सीमाएँ सील की गई है। किसी भी माध्यम से सड़क, रेल से जिले की सीमा में बाहरी लोगों का आगमन प्रतिबंधित किया गया है। जिले में निवासरत नागरिकों को भी जिले से बाहर जाना तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है। जिले के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय कार्यालय बंद किये गये है। आवश्यक सेवा वाले विभाग यथा राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस, विद्युत, दूरसंचार, नगर पालिका, पंचायत, रेल्वे आदि इससे मुक्त रहेंगे। ए.टी.एम., उचित मूल्य की दुकान, एल.पी.जी. गैस सिलेण्डर के रिटैल आउटलेट, मेडिकल दुकान और अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथालाॅजी, पैट्रोल डीजल पम्प, बैंक आदि अपने निर्धारित समयानुसार खुले रहेंगे। फल सब्जी दुकान, खाद्य सामग्री (ग्रोसरी आईटम) आदि प्रतिष्ठान प्रतिदिन अपरान्ह 3 बजे तक ही खुले रहेंगे, तत्पश्चात बंद रहेंगे। जनमानस उक्त प्रतिष्ठानों से दैनिक जरूरतों का सामान क्रय करने के पश्चात सीधे अपने निवास स्थल को गमन करेंगे।
लाक डाउन के दौरान निम्न परिस्थितियों में शिथिल रहेंगे प्रतिबंध
जारी आदेश अनुसार इमरजेंसी ड्यूटी वाले शासकीय कर्मचारी केवल ड्यूटी के प्रयोजन से सम्पूर्ण लाकडाउन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे, किन्तु उक्त कर्मचारियों को अपने साथ आई.डी. रखना अनिवार्य होगा। घर-घर जाकर दूध बाँटने वाले दूध विक्रेता एवं न्यूज पेपर एवं पानी की कैन वितरित करने वाले प्रातः 10 बजे तक सम्पूर्ण लाक डाउन से मुक्त रहेंगे। रोगी, रोगी वाहन (एम्बुलेन्स) तथा शव (मृत शरीर) का परिवहन कर रहे व्यक्ति सम्पूर्ण लाक डाउन से मुक्त रहेंगे। मास्क, सेनेटाइजर, दवाईयाँ, आवश्यक वस्तुओं का परिवहन करने वाले वाहनों एवं ए.टी.एम. कैश वाहन का प्रवेश एवं निकासी जारी रहेगी।
आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधीत के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत अभियोजन किया जावेगा। आदेश का उल्लंघन धारा-188 भारतीय दंड विधान अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आवेगा।