स्थापना दिवस जिस ग्राऊंड मे चल रहा था वहा की छात्राओ को स्कूल मे पढाया जा रहा था 


हरदा जिले के मुखिया स्थापना दिवस के मुख्य अतिथि थे शायद  वे भी इस बात को भूल गये कि यहा सुबह से पहली से आठवी तक की छात्राओ का सरकारी स्कूल लगता है जबकि यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की थी मगर स्थापना दिवस के माईक की आवाज से ही बच्चे खुश रहे कमरे मे बैठे थे माईक की आवाज से पढाई तो हो नही रही थी मगर बेचारे बैठे बैठे ही सस्कृति कार्यक्रम सुन रहे थे कैसा स्थापना दिवस लाखो रूपये खर्च होने के बाद भी उन मासूम छात्राओ को कार्यक्रम दिखाने की चेष्ठा नही कि बलिकाओ के लिए खूब प्रचार प्रसार मे खर्च किये जा रहे है लेकिन शिक्षा विभाग ने  इन छात्राओ को कमरे मे बैठने की जगह कार्यक्रम दिखाना उचित नही समझा जन प्रतिनिधि भी थे अन्य  अधिकारी थे मगर ये कार्यक्रम सिर्फ शासकीय राशि खर्च करने तक ही सीमित रहा है हरदा कलेक्टर महोदय को इस कार्यक्रम मे वहा पर पढाने वाली सरकारी स्कूल की गरीब छात्राओ की अनदेखी को लेकर कई लोगो ने भी असंतोष व्यक्त किया क्योंकि दौड व अन्य कार्यक्रम मे इनको  बुला लिया जाता है लेकिन स्थापना दिवस कार्यक्रम मे सरकारी स्कूल की  छात्राओ की  अनदेखी करना चर्चा का विषय है अगर स्कूल लगाना था नेहरू स्टेडियम पर कार्यक्रम करना था उनकी पढाई प्रभावित नही हुई क्या ये बलिकाओ के साथ  अन्याय नही है मानव अधिकार का उल्लंघन नही है माननीय जिलाधीश महोदय आप इस कार्यक्रम के आयोजक थे आप मुख्य अतिथि थे फिर शिक्षा विभाग ने इन छात्राओ को कार्यक्रम मे क्यो नही बुलाया  सोचने का विषय सैकडो लोगो ने सवाल किया हमने लिखकर आपको याद दिलाया । 


 

 

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