चार च्वन्नी चाॅदी की जय वोलो महात्मा गाॅधी की,के नारो से गंुजा था हरदा नगर

 सन् 1933 मे अस्पृशयता निवारण्या हेतु गाॅधी जी पूरे भारत का भ्रमण का रहे थे 8 दिसम्बर 1933 को उनका हरदा आना तय हो हुआ तब कंाग्रेस कमेटी द्वारा जनता के सभी व गांव की एक सभा बुलाई गई सभा में गाॅधी जी के स्वागत हेतु धन एकत्र करने तथा कार्यक्रम की व्यवस्था किस प्रकार की जाए इस चर्चा हुई सभा मे सर्वश्री दादाभाई नाईक पं. चन्द्रगोपाल मिश्र बेनीमाधव अवस्थी रातनारायण सेठ रामकिशन सराफ रामशंकर उपाध्याय डाॅ सानु चम्पालाल सोकल सुरजमल सराु गयाप्रसाद वर्मा तथा श्री देश पाण्डे मास्टर आदि प्रमुख लोग उपस्थित थें। जनता से चन्द्रा एकत्र करके महात्मा गाॅधी को थैली भेंट करने के लिए सेठ रामकिशन सराफ को कोषाध्यक्ष बनाया गया वालेण्टियर कोर का चार्ज डाॅ. साने तथा श्री देशपाण्डे मास्टर को दिया गया स्टेशन से गाॅधी जी को लाने का कार्य श्री बेनी माधव अवस्थी व श्री सूरजमल सराफ को दो तीन कार्यकर्ताओं के साथ सौपा श्री चम्पालाल सोकल को स्टेशन बाजार तथा गणेश चैक की पूरी व्यवस्था दीं श्री सीताचरण सोकल को लाउड स्पीकर लाने तथा म्यूनिसिपल कमेटी के सहयोग सभा स्थल पर पण्डाल बनाने तथा व्यवस्था करने का कार्य दिया गया मेजर साने नेे महात्मा गाॅधी के मंच व बैठक व्यवस्था का इन्तजाम किया। श्री सीताराम सोकल ने बम्बई जाकर चिकागो कम्पनी के मालिक मोटवानी से कान्टेªक्स करकेे एक लाख लोगो की सभा व्यवस्था का इन्तजाम किया हरदा मे उस समय बिजली नहीं थी अतः बैटरी से चलने वाले लाउड स्पीकर लगाए गए। धन एकत्र करने के कार्य मे कांगेस नगरपालिका तथा शहर के व्यापारियो का सहयोग लिया गया तत्कालीन जिमखाना मैदान जिस स्थान पर आज स्टेडियम और नेहरू कालोनी है वहा पर महात्मा गाॅधी की सभा हेतु विशाल सभा मण्डप बनाया गया जिसमे स्त्रियो और पुरूषो के अलग अलग बैटने की व्यवस्था की गई थी हरदा शहर से गाॅधी जी को देने के लिए रू. 1633.9531 की थैली तथा चाॅदी की एक तश्तरी की व्यवस्था चन्दे की राशि से कि गई 8.12.1933 को सुबह 6 बजे सोहागपुर से होते हुए पेसेन्जर टेªेन से गाॅधी जी हरदा आए उनके साथ उनके सेक्रेटरी श्री प्यारेलाल श्री दामोदारदास मूंदडा मिस स्लेड मीराबहिन पं. रविशंकर शुक्ल आदि थे गंाधी जी को स्टेशन लेने के लिए श्री सूरज सराफ श्री बेनी माधव अवस्थी व डाॅ साने गए गाॅधी जीको रेल लकडी की सीढी से उतारा गया तथा सीढी से ही दूसरे प्लेटफार्म पर चाढाया गया स्टेशन के बाहर खडी सेठ रामकिशन सराफ की खुले छत की डाॅज गाडी मे महात्मा गाॅधी पं. रविशंकर शुक्ला  तथा श्री बेनीमाधव अवस्थ बैठे गाड़ी के ड्रायवर बने सेठ सूरजमल सराफ सड़क के दोनो ओर अपार जनसमूह अनुशासन बद्वतरीके से खडे़ जनता को निर्देश थे कि शान्ति पूर्वक जय जयकार करें तथा फुलों की पॅखुडियाॅ ही फेंकें स्टेशन से रवाना होकर गाडी धीरे धीरे आगे बढने लगी कुलहरदा मिल के पास अपर जनसमूह को देखकर गाॅधी जी ने सेठ सूरजमल को ड्रायवर समझकर कहा ड्रायवर क्या तुम्हें रफ्तार से गाडी चलानी नही आती परन्तु सेठ साहब ने सुनी अनसुनी करके गाडी को धीमी र2तार से ही चलाना जारी रखा चाण्डक के चैाराहे से श्रीमति सावित्री बाई के मकान तक सभी छजजों एवं खिड़कियो मे स्त्रियो एवं बच्चो का अपार समूह उपस्थित था तथा गाॅधी जी का स्वागत फूल की पॅखुडियाॅ द्वारा तथा जयघोष के द्वारा कर रहा था। गाडी धीरे धीरे बढती हुई हरिजन मोहल्ले मे पहुॅची यहाॅ पर हरिजनों के साफ सुथरे मकानोे का गाॅधी जी ने निरीक्षण किय यहाॅ से गाॅधी जी का गाडी श्री हरिशंकर सेठ के मकान के समाने से  गुजरती हुई सीताराम पटाले के घर के सामने की सड़क से गणेश चैक पहॅुची जहाॅ श्री चम्पालाल सोकल ने हाथ के कते सूत की माला से उनका स्वागत किया वहाॅ से सत्यनारायण मन्दिर होते हुए सभा स्थल पर गाॅधी जी कि गाडी जहा पहॅुची वहाॅ लगभग 1 लाख लोग उपस्थित थे सारे देहात खाली हो गए थे इस सन्त को दखने सुनने समझने के लिए हरदा के इतिहास में इतनी बडी सभा आज तक कभी नही हुई गाॅधी जी के हरिजनोद्वार पर भाषण हुए पूरे भाषण को जनता पूरे मनोयोग से सुनती रही सभा समाप्ति के बाद महात्मा गाॅधी जी को हरिजन छात्रावास (जहा आज अन्नापुरा प्राथमिक शाला है) मे ठहराया गया। वहीं सभी ने खाना खाया गाॅधी जी ने बकरी का दूध पीकर चरखा काता। सभा मे गाॅधी जी को रू 1633.9531. की थैली एवं एक चाॅदी की तश्तारी भेंट की तश्तरी को गाॅधी जी ने नीलाम किया इस तश्तरी को श्री चम्पालाल सोकल के पिता श्री तुलसी सोकल ने रू101/- मे खरीदी वह आज भी उनके पास सुरक्षित है। गाॅधी जी की 11 बजे गाड़ी से जाना था हरिजन छात्रावास मे सेठ सूरजमल सराफ को पहचान कर बोले अब मुझै भरोसा है कि तुम 10 मिनट में स्टेशन पहॅुचा दोगे इसलिए मैथोडा आराम करलेता हॅू। गाॅधी जी 11 बजे की गाडी से हरदा से रवाना हुए सभा साम्पत के पश्चात् लोगो की भीड शहर मे सामान खरीदने और पीने मे लग गई । बाजार मे मिठाई और खाने पीने की चीजें और सभी चने तक बिक गए बहुत से लोगो को बाद मे कुछ भी खाने को नही मिला हरदा से गाॅधी जी जब खण्डवा गए तो वहाॅ प्लेटफार्म पर इतनी भीड थी कि उनके साथ गए लोग धक्का मुकी मे फॅस गए गाॅधी जी बडी मुश्किल सेवक नामक पत्र मे लिखा था कि उनके प्रवास के दौरान कैसी व्यवस्था होनी चाहिए तथा यह भी लिखा था कि इतनाही सुन्दर इन्तजाम हरदा मे किया था हरदा को गाॅधी जी का प्रशंसापत्र मिल गया था यहाॅ पर किए जा रहे हरिजनो द्वार कार्यक्रम की गाॅधी जी ने प्रशंसा की हरदा मे बापू आगमन का बहुत ही व्यापक प्रभाव पड़ा एवं क्षेत्र एक नई राजनैतिक स्फूर्ति से फिर संघर्ष के लिए तैयार हांे गया।                                                                                                           डाॅ मनोरमा चाौहान


 


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