भष्ट्राचार रूपी आज के रावण, कुभंकर्ण और इन्द्रजीत का कब होगा वध
पूरे देश में विजय पर्व के रूप में दशहरा का पर्व आज मना रहे है इस पर्व को बुराईयों पर सच्चाई की जीत का पर्व भी कहा जाता है। प्रचीन समय रावण, कुभकर्ण, इंदजीत जैसे दानवों का वध मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने किया था। हम हर वर्ष रावण का पुतला जलाते है तकि कई पीढियों तक यह संदेश जाये की जीत सच्चाई की होती है। और बुराईयों का अतं निश्चित है। वर्तमान आज के समय हमारे देश मे मानवी रूप मेे दानबी हरकतो का दौर चल रहा है चारो तरफ कुछ मानव के रूप में दानव मौजूद है। भष्ट्राचार इतनी चर्म पर है। की पूरे देश इसका रोग फैल चुका है। अगर इस के खिलाफ कोई आवाज भी उठायी जाती है तों जाॅच में भष्ट्र नौकर शाही कुभंकर्ण बन जाते है। जाचं की आड मंे माल कमाने आ लग जाते है वही बडबोले नेता इंदजीत की तरह घमंड मे बुकलाने लगते है। और भष्ट्रचार के मामले जाचं के चक्रव्यू मे फस कर ही दम तौड देतें है जांच करने वाले भी कुभंकर्ण के भी बाप है। क्योकि कुभंकर्ण तो 6 माह निद्रा मे रहता था और इक्कटा भोजन खा लेता फिर कितने भी नगाडे बजाओं उस को फर्क नही पडता था ठीक उसी प्रकार आज के रावण कुभंकर्ण व इंदजीत भी भष्ट्रचारों के लियें कितनी शिकायते करें या फिर कितना ही चिल्लाओं उन को फर्क नही पडता इसका मूल कारण यह है कि आज भष्ट्रचार एक सिस्टाॅम वन गया है नीचे से उपर तक भष्ट्रचार का बोल वाला है। अगर कुछ नीचे वाले ईमानदार हो कर ईमानदारी भी दिखाये तों उपर बाले उन्हे डंस लेते है। और कुछ उपर बाले इमानदारी दिखाये तो नीचे बाले शिकायतो में फंसा देते है इस लिये मानव के रूप में आज दानव सक्रिय है। हराम की कमाई के बल बूते पर आज का भष्ट्र मानव दानव बन गया इस बुराई के अतं के लिये युवाओ को आगे आना चाहिए वर्तमान में भारत युवा दौर में गुजर रहा विश्व मे अपनी आमिट पहचान रखने बाले इस भारत में कुुछ भष्ट्र अधिकारियों व नेताओ के कारण आज भारत अपने ही घर मे परेशान है इसकें दुष्यपरिणाम भी आने लगें है। अगर आने वाली पीढ़ी को भष्ट्रचार से मुक्त रखना है तो विजय दशमी पर सभी युवाओ को संकल्प लेना चाहिए की आज के भष्ट्रचारी रूपी रावण, कुभकर्ण, व इन्द्रजीत का वध करेगे भष्ट्रचारियो के खिलाफ आवाज उठायेगे रिश्वताखाेिरयों को रिश्वत नही देगें और कालाबाजारियों के खिलाफ आन्दोलन करेगे ताकि देश आने वाली आर्थिक कमजोरी सें लड सकें तथा प्रत्येक व्यक्ति का विकास हो सकें।